Saturday, November 3, 2012

अंग्रेजी माध्यम: एक भ्रम

अंग्रेजी माध्यम: एक भ्रम  
   बहुमुखी व्यक्तित्व विकास नही हो सकता अंग्रेजी मध्यम से पढ ने वालों का .
    कारण ,
    १.मस्तिष्क विकास  होता है ,उम्र के ११ साल तक 
    २.बच्चे  ज्यादा चौकस,होते है और ज्यादा सवाल पु छते है  ,इसी उम्र  तक 
    ३.सवाल पु छ ने को ,वैसे भी  डर लगता है,इंग्लिश मे और भी मुश्कील बन जाता है .
    ४.आदत पड जाती है ,चुपचाप सुनानेकी ,और तोते  कि तऱ्ह बगैर समझे   रटने की.फिर जीवन को भी समझ नही सकते .
   ५.जो बहुत बुद्धिमान होते है ,उनको कोई फरक नही पढता,लेकीन करीब ७५% जो सामान्य होते है ,जहा अंग्रेजी वाले जीवनभर गोते  खाते रहते ही,वही मातृ भाषा वाले ,जीवन के किसी ना किसी क्षेत्र मे आखीरकर यशस्वी हो हि जाते है
   ६. ना  अंग्रेजी आती है ,ना सशक्त देशी भाषा ,ना व्यवहार  ज्ञान,बहोत होता है नुकसान.
   ७.अंग्रेजी आने से व्यक्ती बुद्धिमान बन जाता है ,बहोत बडा भ्रम है .
    ८.अंग्रेजी बोलणे के लिये पुरी शिक्षा अंग्रेजी मे लेना जरुरी नही   है .
   ९. फ्रेंच ,रशियन ,जर्मन ,अरेबिक आदी भाषा ये  भी साल दो साल मे शीखकर विदेश जाणे वाले बहोत लोग है .
    बहनो और भाई यो  ,अगर आप को फिर भी डर लगता है ,तो बच्चों को सेमी इंग्लिश(semi English) मे डालो.मातृभाषा, जैसे मां  का दुध है ,बच्चा  हर क्षेत्र मे बलवान हो जायेगा .
FOR MELODIOUS NEW SONGS LOG ON 
www.sangeetjadoo.com 

Translate