मोदी से नितीश :पेट दर्द की बीमारी
जी हा भारत में यह बीमारी बहोत आम है .जब भी कोई अपने बलबूते पर आगे आता है तो तमाम प्रस्थापित लोगो की नींद उड़ने लगती है .क्यों की जब बलवान व्यक्ति सत्ता में आती है तो नकली नेतावो का कोई महत्व नहीं रहता , और चिलर लोग जो अपनी जाती, किस की शिफारीश ,या किसीका विश्वास घात करके,कही न कही उच्च पद पर बैठे है ,यानी जो लोग सोनेका पालिश लगाए हुए पीतल जैसे है ,वो खुद सता में नहीं आ सकते लेकिन किंग मेकर बनकर अप्रत्यक्ष रूप में सत्ता में भागीदार बन सकते है .इसीलिए मोदी जैसे बलवान को साथ देने के बजाय वे नितीश में उनका पर्याय धूड़ते है.क्यों की मोदी जैसा स्वयंभू नेता सत्ता पाता है तो वह ,कमजोर और नकली लोगो के इशारों पर काम नहीं कर सकता ,मतलब ऐसे लोगो का कोई महत्व नहीं रहेगा .कमजोर व्यक्ति को सता में बिठा कर ,सत्ता की डोर अपने हात में रखना ,यही इस देश की राजनिती का प्रमुख लक्षण है .
इसी के तहत देश के पहले प्रधान मंत्री से लेकर आज तक की राजनीती चला रही है .
जी हा भारत में यह बीमारी बहोत आम है .जब भी कोई अपने बलबूते पर आगे आता है तो तमाम प्रस्थापित लोगो की नींद उड़ने लगती है .क्यों की जब बलवान व्यक्ति सत्ता में आती है तो नकली नेतावो का कोई महत्व नहीं रहता , और चिलर लोग जो अपनी जाती, किस की शिफारीश ,या किसीका विश्वास घात करके,कही न कही उच्च पद पर बैठे है ,यानी जो लोग सोनेका पालिश लगाए हुए पीतल जैसे है ,वो खुद सता में नहीं आ सकते लेकिन किंग मेकर बनकर अप्रत्यक्ष रूप में सत्ता में भागीदार बन सकते है .इसीलिए मोदी जैसे बलवान को साथ देने के बजाय वे नितीश में उनका पर्याय धूड़ते है.क्यों की मोदी जैसा स्वयंभू नेता सत्ता पाता है तो वह ,कमजोर और नकली लोगो के इशारों पर काम नहीं कर सकता ,मतलब ऐसे लोगो का कोई महत्व नहीं रहेगा .कमजोर व्यक्ति को सता में बिठा कर ,सत्ता की डोर अपने हात में रखना ,यही इस देश की राजनिती का प्रमुख लक्षण है .
इसी के तहत देश के पहले प्रधान मंत्री से लेकर आज तक की राजनीती चला रही है .
No comments:
Post a Comment