Sunday, March 8, 2015

क्या मनरेगा किसानों की मदद करेगा ?

क्या मनरेगा किसानों की मदद करेगा ? 

करोडो रुपये खर्च करके अगर मनरेगा के मजदुरों द्वारा खड्डे ही खुदवाने है तो क्यू ना खेतों मे वही खड्डे थोडे तरीकेसे खोद  कर उन्हे कंपोस्ट खाद के खड्डे बनाये ?और सिर्फ खड्डे हि क्यू  अगर हम पुरे मनरेगा को खेती के काम मे जुटानेका कोई हाय टेक तरीका,   मसलन कम्पुटर और खेती के आधुनिक औजारोंका इस्तेमाल कर सकते है इस तरह किसानों का बहोत सारा पैसा और श्रम बच जायेगा और मनरेगा का सही उपयोग होगा यांनी मनरेगा एक उत्पादक उपक्रम बनेगा .
 इसकी रूपरेखा कुछ  इस तरह हो  सकती है 
१ )राष्ट्रीय क़म्पोस्ट खाद निर्माण   -युरिया जैसे तमाम रासायनिक उर्वरकोंके इस्तेमाल से खेती जमीन की  उपजावूता  नष्ट हो रही है ऐसे खेतो मे बीना  रासायनिक उर्वरकोंके अच्छी फसल नही आ सकती,  उतरोतर क्षारता बढ कर जमीन बंजर हो जाती है . और तो और   रासायनिक उर्वरक बहोत ही महंगे होते है ,इन कारणों  से  एक तो फसल बहोत कम आती है और दुसरी तरफ से कृत्रिम खाद  और बीज बियानो के उचे दामो के कारण फसलो का उत्पादन मुल्य इतना बढ जाता  है की खेती करना और उपजीविका चलाना अश्यक्य प्राय हो जाता है ,ऐसे मे आजकल   मनरेगा द्वारा  मजदुरोंको खेती से दूर करने से उसकी मदद करणे वाला आखरी आधार भी चला गया है और इसी कारण से मजदुरिके दाम भी बढ गये है,  अपना  और खेती का अस्तित्व बचा ने के लिये  किसानों को  कर्जे लेने  पडते है .जाहीर है  के ऐसे मे  किसान वह  कर्जा उतार नही सकता,इस चक्रव्यूह मे फसे हुये किसानोंको ,आत्महत्या की मजबुरी से बाहर निकालने के लिये  ,प्रयास करणे कि शुरुवात राष्ट्रीय  क़म्पोस्ट खाद निर्माण से की जा सकती  है यह बहोत हि कारगर उपाय है बडे पैमाने पर क़म्पोस्ट खाद निर्माण  के लिये खेतों मे मनरेगा  द्वारा उपयुक्त खड्डे बनाने पर किसान सेंद्रिय खाद बना सकते है ,जिसके इस्तेमाल से   १) रासायनिक उर्वरकों का खर्चा या तो बच जायेगा या धीरे धीरे उसके  कम इस्तेमाल से खर्चा भी  कम होता जायेगा     २)जमीन कि उपज क्षमता बढ कर फसल भी अच्छी(जादा ) आयेगी और  
इस तरह मनरेगा और राष्ट्रीय  क़म्पोस्ट खाद निर्माण से किसानों को बहोत बडी राहत  मिल जायेगी  इस नाविन्य पूर्ण सोच को हम आगे बढायेंगे तो चमत्कार हो सकता है ! 
    क्यो ना  पूरी  मनरेगा  या फिर उसका  जादातर मानव संसाधन कृषी क्षेत्र पर लगाये ?  
कुछ इस तरह -
१)हर गावं के किसानो और उनकी खेती,नियोजित फसल और उसके लिये श्रम कार्य कि सूची बनाये,और कृषी कार्य के लिये तारीख तथा समय तय कर उसकी जानकारी किसानोंको दे . इसके लिये काम्पुटर और इंटर नेट का इस्तेमाल करे ,आधार कार्ड भी बहुत हि उपयुक्त साबित होगा .  

२)नियोजित तरीके से मनरेगा,मजदुरों को सरकारी वाहनो द्वारा एक क्षेत्र से दुसरे क्षेत्रो के खेतो तक ले जाये और उनके द्वारा ट्रकटर आदी का उपयोग कर के कृषी कार्य कर ले 

३) मजदुरो द्वारा  खेतो मे छोटे छोटे कृत्रिम  तालाब बनाये जाये , 

४)बिंदु सिंचाइ का साहित्य   सबशिडी पर मुहया कराये ,कुछ मजदूर और किसानो को आधुनिक यंत्र इस्तेमाल करणे का प्रशिक्षण दे कर ,काम मे लगाये   
३)सरकार स्वयं   सिड प्रोडक्शन करे और  बढाये ,किसानो को कम दामो मे बीज उपलब्ध करे या मुफ्त मे  दे . ४)किसी क्षेत्र विशेष मे कीस तरह कि फसल का उत्पादन लेना है वह भी तय करणे का अधिकार इस योजना मे सहभागी होनेवाले किसान सरकार को आपने आप हि देंगे(मुफ्त के  मजूर जो मिलेंगे!)इससे  फसल नियोजन  का केंद्रीकरण  और सरकारी करन  किया जा सकता है,
मनरेगा का इस दिशा मे  प्रयोग करना ,बहोत ही उत्पादक साबित होगा और देश को  सही मायने मे सुजलाम सुफलाम बना सकता है यह कदम ,जिसे  पसंद आया ,कृपया कॉपी करे और प्रधान मंत्री तथा मानव संसाधन मंत्री  को भेजे ,इससे हम किसानो को आत्महत्या करणे से परावृत्त कर सकते है हमारी  खेती ,किसान ,गाव , और पर्यावरण  को भी  बचा सकते है . 
     देश के लिये  यह नेक काम  जलद से जल्द करना बहुत जरुरी है .      



     

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